मृदा परीक्षण के लाभ
- पोषक तत्वों की कमी का पता लगाता है।
- उपयोग किये जाने वाले पोषक तत्वों की सही मात्रा जानता है।
- आवश्यक उर्वरक की उचित मात्रा को जानता है।
- खेती की लागत कम है, इससे पैसे की बचत होती है।
- उपज बढती है।
- मिट्टी स्वस्थ बनी रहती है।
- भूजल प्रदूषित नहीं होता है।
- किसानों की आय बढती है।
- फसल के स्वास्थ्य में सुधार करता है। मिट्टी के पीएच स्तर का पता लगाता है।
मिट्टी का नमूना कैसे लें
- सबसे पहले जमीन से घास को साफ करना होगा।
- 4 से 5 स्थानों पर लगभग 6 इंच गहरे V आकार के गड्ढे तैयार करें और उनसे मिट्टी के नमूने लें।
- 4 से 5 स्थानों से ली गई मिट्टी को एक स्थान पर एकत्र कर मिला लें।
- अब उस मिट्टी का लगभग आधा किलो (500 ग्राम) मिश्रण नमूना तैयार करें।
- यदि नमूने में कंकड़ या घास आदि हो तो उसे साफ करके छाया में कुछ देर सूखने के लिए रख दें। इस मिट्टी के नमूने को साफ कपड़े की थैली में भरकर रखें तथा नमूने के लेबल के अंदर किसान का नाम, किसान के पिता का नाम, खेत का नाम, भू-अभिलेख संख्या, पता, अपना नाम, पिता का नाम, मोबाइल नंबर आदि लिख दें।
मिट्टी के नमूने लेते समय सावधानियां
- ऐसी जगह से मिट्टी का नमूना न लें जहां पहले से ही गड्ढा हो।
- खेत के अवरोधकों के पास, खेत से लगी सड़क के पास तथा जहां बाड़ लगी है वहां से नमूने न लें।
- लेबल और सूचना पर्ची में सभी विवरण भरें।
- नमूना देने से 3 से 5 दिन पहले जमीन से नमूना भरें।
- सावधान रहें कि गीली मिट्टी के नमूने न दें।
- यदि मिट्टी अधिक गीली हो तो उसे 3 से 5 दिन तक छाया में सूखने दें, फिर नमूना दें।
- यदि नमूना खड़ी फसल से लेना हो तो पौधों की पंक्तियों के बीच खाली स्थान से मिट्टी का नमूना लें।

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